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अविरल गंगा, स्वच्छ गंगा।

हिमालय की गोद से, बहती एक अविरल धार है, प्रवेश होकर भारत में, करती इसका सर्व श्रंगार है। रूप विशाल इसका, ये दरिया आबाद है, महिमा इसकी, भी अपरंपार है, हां तभी तो, ' गंगा ' भारत की शान है। बनारस के तट से,  ऋषिकेश की पावन भूमि पर, ये निरंतर प्रवाहमान है। दर्शन पाने को इसके,  कई मीलों की कतार है। ये आस्था और श्रद्धा का सर्वोच्च स्रोत है, तो कहीं मन के मंदिर में, ये सर्वदा विद्यमान है। प्रदूषित कर दे इसे, क्या इतना बुरा इंसान है? जो जल जीवन का निवास, और लोगों की प्यास है, प्रदूषित कर दे इसे, क्या इतना निर्दयी इंसान है? जो किसी के खेत की जान, जिससे बिजली का भी उत्पाद है, प्रदूषित कर दे इसे, क्या इतना पापी इंसान है? ऐसी हालत में देख गंगा को, बड़ी शर्म मुझे आती है, कैसे निर्मल बहने वाली, आज गंदगी में नहाती है। जिसने सदियों से इतना लाभ दिया, अपना पवित्र जल हमारे नाम किया, तो क्यों, ऐसा दुर्व्यवहार हमने इसके साथ किया? अगर आज भी हम प्रण लें, गंगा को स्वच्छ बनाना है, पुन: इसे साफ़ कर, हमें गंदगी को हटाना है। आखिर, इतना कुछ किया इसने, हमे थोड़ा तो कर दिखाना है। हां, हमें वो इतिहास दोहराना ...

Indian Army 🇮🇳❤️

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In the memory of those gallant warriors, Whose appraisal finds the words at short. The Bravehearts of this motherland, And to this nation, the most beloved part. Those who laid their lives guarding the frontiers. Those who sacrificed their priorities before the nation. Those who pledged to avenge the intruders, being at the stake. Are the true incarnation of god, Serving their patriotism in the frozen nights, keeping wide awake. In those holy festivals, the warm gathering feels your grace.  The candles that once burnt bright,  Lit low of your absence. And wish the fire in you, To roar high over the evils. Your valorous stories are endless, And a lot more to be instilled in us. Your devotion and courage is immeasurable, And all of your actions, that prove just. Deserve the most exquisite place in all the billion hearts, Safeguarded in your custody, Throbbing in peace.

बेटियां- अटल, प्रबल, प्रचण्ड।

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क्या, ना झुका सर अब? क्या, नहीं भ्रष्ट हुआ स्वाभिमान तुम्हारा? क्या, शेष है अब इज़्ज़त तुम्हारी? जब-जब तुमने एक बेटी को तड़पाया है, हरदम जब तुमने उसको नीचा दिखाया है। हां, वही पावन रूप जिसने तुम्हें इस धरती पे बुलाया है।  उन्हें दुत्कारने वाले, उसकी काबिलियत की तुलना करने वाले, इतना समर्थ तुम्हें किसने बनाया है? ये तो अवर हैं, ये तय करने वाले, भगवान तुम्हें किसने बनाया है? बनेंगी बेटियां सशक्त तो, होगा देश का विकाश। रौनक होगा दीपक ज्ञान का, होगा पितृसत्तात्मकता का विनाश। ना होगी सीमा कोई तरक्कियों की, होगा खुशियों का संचार। ना हक से ना बल से, रहेगा ना पीछे कोई शर्म से, अटल रह कर अपने मार्ग पर, मिलाएंगी बेटियां भी कदम, कदम से। महत्व समझो ज्ञान का, यूं ही मज़ाक में ना टाला करो। बेटों को तो विद्यालय भेज दिया, बेटियों को भी तो डाला करो। अज्ञान के समंदर में, ज्ञान का पुष्प पनपने दो, बेटियां तो घर की लक्ष्मी होती हैं, आखिर उनको भी तो पढ़ने दो। शिक्षित होगी नारी तो, शिक्षित पूरा परिवार होगा। अवगत होगी वो भी जब, तब ही भारत माता का सपना साकार होगा। देवी के नौ अवतार से सीख लो, क्या-क्या कर द...

शिक्षक!

 ए ईश्वर, रहे ना जग में ऊंचा नाम किसी का, रखना सलामत अपनी हिफाज़त में, मेरी हर दुआ में है शिक्षक नाम जिसका। ज्ञान की वो पावन मंदिर है शिक्षक, जीवन के अंधियारे में चमकती वो चांदनी है शिक्षक, सफलता के मार्ग की वो रौशनी है शिक्षक, एक माता और एक पिता का वो अवतार है शिक्षक, निष्पक्ष, निहस्वार्थ स्नेह की वो मसाल है शिक्षक, तुम्हारी उचाईयों का वो सपना साकार है शिक्षक, जिनकी गुणों को माप ना पाए ये कलम आज, ऐसे गुणों के सरताज है वो शिक्षक।

Digital Learning is the Thing of Today!

 And, all of it changed, Those who discovered miles, had to be caged. Uncertainty struck human lives, Unknown of the way, They managed themselves in their miniature hives.  When, it was unsafe stepping out, IT brought everything in touch. These hardships saw an extraordinary crisis, And, which got us on the track, IT was a boon as such.  As it is everything has been strange, And adversities certainly have a wide range. We witnessed an increasing importance of digital learning, With the young minds still keeping up their educational yearning. Teachers have worked their days in sweat, So that a platform they could create, For the students who ran late. And if digital learning is successful today, Thank your teachers and your victory that should repay. If you take everything as fun, Yes, it has cons. Digital world is vast, And so is the possibility of harm. Use it wise, Leap ahead, fly above, and rise.

तो हम क्यों ना एक हैं?!

ना बंट पाई इंसानियत धर्म से, तो बांट दिया हमें जात में। ना मिटा पाए हमारा साथ तो, थमा दी जात की कड़ियां हमारे हाथ में। आज़ाद हुए ही हम कब, जब हमारे ही सौ रंग थे, जैसे बांट दिया हो इस देश के हर अंग को, क्या धर्म के ये असंख्य भेद कम थे? ना करो घमंड इस जात का, ये बनावट तो है सामान सा, हो जाएंगे दफ़न किसी दिन को इसी मिट्टी में सब, है अभिमान फिर तुम्हें किस बात का? अंबर भी एक है, है धरती भी एक, तो है फिर क्यों हमारी पहचान अनेक? है तो हमारा ईश्वर भी एक ही, तो है ना क्यों हर इंसान एक? ना झुक जाएगा सम्मान हमारा, ना, आ जाएगा प्रलय, हम जो सब प्रण कर लें, कि अब ना सौ धर्म होंगे और ना होगा जातिभेद, बस एक इंसानियत होगी और होगा हर इंसान का मेल।